दाय़रा
डायरी के कुछ मैले और धुंधले पन्ने
Tuesday, November 15, 2016
नाम
नाम
अपना नाम लिखने बैठी,
अक्षरो को ढूढ़ती, पहचानती, सोचती रही,
कौन सा अक्षर मेरा है
?
फिर उन्हें करीने से सजाने में,
सुबह शाम में समा गई।
अब सोचते बैठी हूँ,
क्या था वो,
भला सा मेरा नाम
?
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